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Atulya Nayan of Jainism (ANOJ)

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  अनुच्छेद 21 के ‘भाव’ (Spirit) को जैन न्यायशास्त्र के ‘प्राण-रक्षा’ सिद्धांत से जोड़कर एक अनुपम संगम प्रस्तुत किया है। यह न केवल भारतीय संविधान को जैन न्यायशास्त्र की रोशनी में देखने का नया द्वार खोलता है, बल्कि तीर्थंकरों की अमर शिक्षाओं को आधुनिक न्याय-व्यवस्था से जोड़ता

“कैसे शासन करें” बनाम “शासन कौन करे”: आदिनाथ तीर्थंकर की वैश्विक जैन राजनीति और असंख्य काल का प्रभाव जैन तीर्थंकरों के अनुसार जैन कानून: आदिनाथ तीर्थंकर (ऋषभनाथ) से गहरा संबंध – असि, मासि, कृषि और दंड व्यवस्था Antiquity In Politics आदिनाथ तीर्थंकर (ऋषभनाथ) – प्रथम तीर्थंकर और सभ्यता के

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